पं. वासुदेव विद्यालंकार स्मारक छात्रवृत्ति

प्रकाशन

क्र.01

वैदिक समाज-व्यवस्था

Unknown
क्र.02

राज्य-व्यवस्था

Unknown
क्र.03

वैदिक साहित्य में नारी

Unknown
क्र.04

आयुर्वेद के ज्ञाता महर्षि दयानन्द

Unknown
क्र.05

भारत में शिक्षा अथवा अशिक्षा

Unknown
क्र.06

धर्म का स्वरूप

Unknown
क्र.07

आपत्काल के उन्नीस महीने

Unknown
क्र.01

वैदिक समाज-व्यवस्था

व्यावहारिक मार्गदर्शिका

वैदिक समाज-व्यवस्था

Unknown

अनेक बार इस विषय पर विवाद होता देखा गया है कि महर्षि दयानन्द धार्मिक क्षेत्र के महापुरुष थे या समाजोद्धारक नेता? किन्तु जिन्होंने महर्षि दयानन्द के व्यक्तित्व व कृतित्व का गहन अध्ययन किया है, वे जानते हैं कि यह विवाद निरर्थक है।

विषय-सूची

  • 01
    वर्ण-व्यवस्था

    पृ.19
  • 02
    आश्रम-व्यवस्था

    पृ.37
  • 03
    गृहस्थाश्रम व नारी

    पृ.53
क्र.02

राज्य-व्यवस्था

व्यावहारिक मार्गदर्शिका

राज्य-व्यवस्था

Unknown

आर्य समाज की जन्मशताब्दी के अवसर पर 'महर्षि स्वामी दयानन्द के विचारों के अनुकूल राज्य-व्यवस्था कैसी होनी चाहिए' - इसका विस्तृत विवरण प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से करते हुए मैं अपार हर्ष का अनुभव कर रहा हूँ।

विषय-सूची

  • 01
    शासन-व्यवस्था

    पृ.87
  • 02
    शासक और शासित

    पृ.99
  • 03
    रक्षा-व्यवस्था

    पृ.105
  • 04
    अर्थ-व्यवस्था

    पृ.119
  • 05
    न्याय-व्यवस्था

    पृ.131
  • 06
    देश की उन्नति व स्वतंत्रता के प्रेरक: महर्षि दयानन्द

    पृ.145
क्र.03

वैदिक साहित्य में नारी

व्यावहारिक मार्गदर्शिका

वैदिक साहित्य में नारी

Unknown

वैदिक नारी के संबंध में मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि संपूर्ण वैदिक साहित्य में वेद से लेकर सूत्र-ग्रंथ-पर्यन्त नारी-विषयक प्रायः एक ही विचारधारा उपलब्ध होती है।

विषय-सूची

  • 01
    नारी: कन्या रूप में

    पृ.163
  • 02
    गृहस्थाश्रम में प्रवेश

    पृ.177
  • 03
    पत्नी और घर

    पृ.193
  • 04
    पत्नी और पति

    पृ.201
  • 05
    नारी: जननी रूप में

    पृ.215
  • 06
    विधवा और उसकी स्थिति

    पृ.231
  • 07
    नारी और उसके संबंधी

    पृ.237
  • 08
    श्रृंगार व वेश-भूषा

    पृ.245
  • 09
    नारी और यज्ञ

    पृ.249
  • 10
    नारी और उसकी स्वतंत्रता

    पृ.255
  • 11
    अपना वक्तव्य

    पृ.261
क्र.04

आयुर्वेद के ज्ञाता महर्षि दयानन्द

व्यावहारिक मार्गदर्शिका

आयुर्वेद के ज्ञाता महर्षि दयानन्द

Unknown

महर्षि दयानन्द मनुष्य को अणु से लेकर ब्रह्माण्ड तक के ज्ञान को प्राप्त करने का निरन्तर प्रयत्न करते रहने का उपदेश करते थे।

विषय-सूची

  • 01
    आयुर्वेद की शिक्षा की अनिवार्यता

    पृ.287
  • 02
    सन्तानोत्पत्ति और सन्तान का पालन

    पृ.289
  • 03
    स्वास्थ्य रक्षा के साधन

    पृ.297
  • 04
    महर्षि दयानन्द द्वारा निर्दिष्ट औषधियाँ

    पृ.313
  • 05
    महर्षि दयानन्द पर रोगों का आक्रमण: कारण और उपचार

    पृ.319
क्र.05

भारत में शिक्षा अथवा अशिक्षा

व्यावहारिक मार्गदर्शिका

भारत में शिक्षा अथवा अशिक्षा

Unknown

भारतीय संस्कृति में शिक्षा का आरम्भ बालक के होश संभालने पर उसे अक्षराभ्यास आदि सिखाने से नहीं माना, वरन् उससे भी पूर्व शिशु के लिए किये गये प्रत्येक प्रयत्न को शिक्षा कहा है।

विषय-सूची

  • 01
    प्राचीन शिक्षा का आरम्भ

    पृ.335
  • 02
    ब्रिटिश शासन से पूर्व भारत में प्रचलित शिक्षा प्रणाली

    पृ.359
  • 03
    ब्रिटिश शासन द्वारा आरोपित शिक्षा-प्रणाली

    पृ.367
  • 04
    स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय-शिक्षा के आन्दोलन

    पृ.371
क्र.06

धर्म का स्वरूप

व्यावहारिक मार्गदर्शिका

धर्म का स्वरूप

Unknown

विविध भाषाओं को बोलने वाले और भिन्न-भिन्न धर्मों (पंथों) को मानने वाले लोगों को इस भूमि पर इस प्रकार प्रेम से मिलकर रहना चाहिए जैसे एक घर के लोग रहा करते हैं।

विषय-सूची

  • 01
    धर्म का स्वरूप

    पृ.471
  • 02
    धर्म के लक्षण

    पृ.477
  • 03
    धर्म के साधन

    पृ.515
  • 04
    धर्म का आचरण

    पृ.533
  • 05
    वैदिक धर्म का उद्धारक

    पृ.543
  • 06
    धर्म की सार्वभौमिकता

    पृ.561
  • 07
    साम्प्रदायिकता, धर्म, धर्मनिरपेक्षता व धार्मिक शिक्षा

    पृ.567
  • 08
    धर्म और मार्क्सवाद

    पृ.577
  • 09
    धर्म और राजनीति

    पृ.589
  • 10
    इस युग में अधर्म व बुराई क्यों?

    पृ.595
क्र.07

आपत्काल के उन्नीस महीने

व्यावहारिक मार्गदर्शिका

आपत्काल के उन्नीस महीने

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मेरी जेल-दैनन्दिनी में आपत्काल, दिल्ली व अम्बाला जेल के विवरण के साथ सरकार के राजनीतिक घटनाचक्र का भी एक तथ्यात्मक वर्णन है।

विषय-सूची

  • 01
    जेल जाने से पूर्व

    पृ.609
  • 02
    और अन्ततः जेल पहुँच ही गया!

    पृ.617
  • 03
    नियमित दैनन्दिनी

    पृ.625
  • 04
    और अब यह अम्बाला जेल

    पृ.663
  • 05
    सात दिनों की अस्थायी मुक्ति (पैरोल)

    पृ.695
  • 06
    फिर उसी पुराने घर में

    पृ.699